
छायावादी कवियों की नवीन चेतना के प्रसार के परिणामस्वरूप छायावादी रूढ़ि विद्रोही नवीन युग बोध ने इन्हें समस्त रूढ़ि बन्धनों का तिरस्कार कर अपने भावों के संप्रेषण के लिये तथा विचारों के अनुकूल भिन्न-भिन्न प्रकार की नयी काव्य-विधाओं की रचना के लिये वाध्य कर दिया । यही कारण है कि छायावादी काव्य में काव्य-रूप गत वैविध्य मिलता है । परन्तु विविध काव्य-रूपों के होने पर भी छायावाद का अधिकांश प्रगीत-काव्य ही है ।
प्रगीत के अनेक भेद-प्रभेद हैं, परन्तु छायावाद में जिन प्रगीति-भेदों में काव्य रचना हुई है, वे निम्नलिखित हैं -
- संबोधन-गीति (Ode)
- चतुर्दशपदी (Sonnet)
- शोक-गीति (Elegy)
- गीत (Song)
- पत्र-गीति (Epistle)

